मुरली तेरा मुरलीधर 34
सुन अनजान प्राणतट का मोहाकुल आवाहन मधुकर रस सागर की तड़प भरी सब चाहें ममतायें निर्झर स्मरण कराता जन्म जन्म के लिये दिये अनगिन चुम्बन टेर रहा है प्रीतिमादिनी मुरली तेरा मुरलीधर।।186।। मृदु गलबहियाँ दे बन जाता हार तुम्हारा...
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हिमांशु । Himanshu
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[20 Nov 2009 11:48 AM]



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