ब्रह्माक चिंता

कतेक रास बात रूपेश कुमार झा 'त्योंथ' ब्रह्माक चिंता ब्रह्मा कयलनि अनुपम श्रृष्टि, श्रम सं ओ रचलनि इंसान। बुद्धि संग द' बल-विवेक, फुंकलनि ओहि मे ओ स्वर्णिम जान। तइयो हुनका नहि भेटलनि तृप्ति, द' देलनि मनुज कें असीमित ज्ञान। भेजलनि जखन धरती पर ओकरा, छल ने जीव कोनो ओ... [पूरी पोस्ट]
writer आदि यायावर
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[20 Nov 2009 11:33 AM]

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