मन की लटाई पर निन्दा का माझा और वो लेखन का गुड्डी बकाट्टा!

chhammakchhallo kahis आह! मन बहुत दुखी है. कम्बख्त बार बार सोचता है कि लेखक ही बनना था तो हिन्दी और मैथिली के क्यों बने? अपने जन्म पर भी अफसोस होता है कि जन्म ही लेना था तो एक आम आदमी बनकर क्यों जन्मे? आप चाहें तो कह लें कि आम औरत. मुहावरे में भी थोड़ा बदलाव आ जायेगा और ज... [पूरी पोस्ट]
writer Vibha Rani

हिन्दी लेखन

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[20 Nov 2009 10:39 AM]

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