साहित्य से क्यों ओझल होता जा रहा ग्राम्यांचल? साहिती सारिका का ताजा अंक
साहिती सारिका का ताजा अंक (जुलाई-दिसम्बर) यह इस मायने में भी महत्वपूर्ण है कि गीतकार मार्कण्डेय प्रवासी और नवगीतकार सत्यनारायण के कविता और आलोचना पर बेवाक विचार पाठकों को सोचने पर विवश कर देते हैं । सत्यनारायण ने आलोचना के दायित्वों को रेखांकित करते...
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अरविन्द श्रीवास्तव
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[20 Nov 2009 05:39 AM]



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