प्यास...

EDHAR HAI भीषण गर्मी पड़ रही थी, मैं यूं ही अकेला पैदल चला जा रहा था। दूर-दूर तक कोई पेड़ या घर भी नजर नहीं आ रहा था। पैदल चलते-चलते बिल्कुल ही थक चुका था। पैर भी लड़खड़ाने लगे थे। वे आराम मांग रहे थे। प्यास से गला सूख चुका था। मुंह में लार भी नहीं बची थी कि मुंह... [पूरी पोस्ट]
writer EDHAR HAI
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[20 Nov 2009 00:25 AM]

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