सेक्स एक शक्ति है, उसको समझिए।

ओशो चिन्‍तन गतांक से आगे--- आदमी को हमने परवर्ट किया है, विकृत किया है और अच्छे नामों के आधार पर विकृत किया है। ब्रह्मचर्य की बात हम करते हैं। लेकिन कभी इस बात की चेष्टा नहीं करते कि पहले मनुष्य की काम की ऊर्जा को समझा जाए, फिर उसे रूपांतरित करने के प्रयोग भी कि... [पूरी पोस्ट]
writer राजेंद्र त्‍यागी
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[19 Nov 2009 23:55 PM]

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