अलविदा ज़िन्दगी

अनुभूति कलश हम भी हरे थे,चुलबुले थे, ज़िन्दगी के हर रंग जिये थे आज हम मुरझा गये हैं दुख के बादल छा गये हैं। ज़िन्दगी की शाम में देगे नहीं कोई सदा हम, आखिरी लम्हें तो जी लें कल कहेंगे अलविदा हम। शिकवा नहीं कोई किसी से सबको भी आना यहीं हैं। आज जी भर कर विलस लो छोड... [पूरी पोस्ट]
writer ramadwivedi

सृजन के प्रिय क्षणअलविदा ज़िन्दगी

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[19 Nov 2009 23:01 PM]

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