लोकतंत्र की बहती गंगा में लगालो डुबकी

व्यंग्य प्रमोद ताम्बट गुज़रा हुआ ज़माना होता तो आज़ादी आंदोलन की नैतिकता के खुमार में डूबी हुई राष्ट्रभक्त नेताओं की राष्ट्रभक्त पत्नियाँ मधु कोड़ा को जी भर कोसतीं, थू-थू करतीं, भर्त्सना-आलोचना और जो कुछ-कुछ अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अन्तर्गत किया जा सकता था क... [पूरी पोस्ट]
writer vyangya
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[19 Nov 2009 22:57 PM]

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