गीत कैसे लिखूं
तीलियां घिसते घिसते थकीं उंगलियां वर्त्तिका नींद से जाग पाई नही शब्द दस्तक लगाते रहे द्वार पर सुर ने कोई गज़ल गुनगुनाई नहीं आपका है तकाजा रचूँ गीत मैं चांदनी की धुली रश्मियों से लिखे गीत कैसे लिखूं आप ही अब कहें जब कि पायल कोई झनझनाई नहीं ************...
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राकेश खंडेलवाल
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[19 Nov 2009 20:58 PM]



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