सूरज को साहिल तेरे आगे ही ढ़लना होगा…
हर मुश्किल से तुमको निकलना होगा, ख़ुद ही, अपना ख़ुदा बनना होगा… चिलचिलाती धूप और कँपकँपाती सर्द, बेहद क़रीब से इनके गुज़रना होगा… वक़्त दिखायेगा कभी, कुछ ग़लत राहें, आँखों को हरदम ही खुला रखना होगा.. डँस लेगा, आस्तीन में छुपा साँप कभी, उनपे भी तुमको, हौले...
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राहुल कुमार
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[19 Nov 2009 16:45 PM]



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