भाषा प्रवाह मतलब “मन का रेडियो बजने दे ज़रा!”

ई-स्वामी वैचारिक प्रवाह लहर है उसकी अपनी गतिक ऊर्जा है जिसमे बहना होता है! फ़िर जब शब्दों और भावों का कनेक्शन जुड जाता है – अभिव्यक्ति का बल्ब का जल जाता है. फ़िर उसमे आप बाकी तानें-मुरकियां (रस/उपमाएं/अलंकार) मिला सकते हैं. मैने भी की हैं कुछ कोशिशें.... [पूरी पोस्ट]
writer eswami

BloggingFeaturefeaturesलिखा-ई

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[19 Nov 2009 13:41 PM]

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