टिक टिक घड़ी
जीवन की अविरल चलती घड़ी कभी मुड़े ना पीछे बस आगे ही बढ़ी कभी दुख की घड़ी तो कभी खुशियों की लड़ी हर पल को सिलते बुनते हुये सतरंगी सपने संजोते हुये घावों पे मलहम लगाते हुये सबसे हाथ मिलाते हुये हर तरह से साथ निभाते बढ़ी जीवन की अविरल चलती घड़ी। कानों में ज्यो...
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JHAROKHA
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[19 Nov 2009 13:38 PM]



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