तुम
तुम रहे हो जिंदगी में एक आदत की तरह / हम जिए तुमको इबादत की तरह // तुम हमें मुस्कान से छल ने लगे / आजकल की इस सियासत की तरह // आँधियों के ढेर पर बैठे हुए &...
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डॉ.भूपेन्द्र कुमार सिंह
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[19 Nov 2009 09:32 AM]



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