एक घटना .....
तेरी यादें ... बहुत दिन बीते जलावतन हुई जियीं की मरी ---कुछ पता नही | सिर्फ़ एक बार --एक घटना घटी ख्यालों की रात बड़ी गहरी थी और इतनी स्तब्ध थी कि पत्ता भी हिले तो बरसों के कान चौंकते | फ़िर तीन बार लगा जैसे कोई छाती का द्वार खटखटाता और दबे पांव छत पर...
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रंजना [रंजू भाटिया]
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[19 Nov 2009 06:39 AM]



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