करतार के श्रंगार का उपहार पचमढ़ी

आत्मदर्पण साथियों मेरे पिताजी श्री पी डी दुबे ने बहुत पहले पचमढ़ी की खूबसूरती पर एक कविता लिखी थी | अभी एक दिन उन्होंने पढवाई तो आप सबके सामने लाया | मेरे पिताजी नौकरशाह रहे हैं लेकिन लिखते भी रहे हैं | मेरे पिताजी की नजर से आप देखें पचमढ़ी | आजकल शोभापुर मेरे... [पूरी पोस्ट]
writer प्रशांत दुबे
views
20
upvote
1
downvote
0
rating
1
comments
0
[19 Nov 2009 03:57 AM]

Free Vedic Astrology From Astrobix