तन्हाई

गठरी तन्हा तन्हा सफ़र जिन्दगी का । साथ मुझको मिला न किसी का ॥ उनके दामन से निकली जुदाई । अब भरोसा नही है किसी का ॥ उनके बिन तारे लगते हैं फीके । रंग उतरा सा है चाँदनी का ॥ लोग सजने सँवरने पे घायल । मुझ पे बिजली गिरा सादगी का ॥ चन्द टुकड़ों पे बिकन... [पूरी पोस्ट]
writer अजय कुमार

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[19 Nov 2009 03:26 AM]

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