व्यंग्य गीत -

virendra jain ke nashtar लेकिन तेरा नाम नहीं है वीरेन्द्र जैन् तख्त वही है ताज वही है गीत वही है साज़ वही है अब तक सूरज चाँद वही है लेकिन तेरा नाम नहीं है अब तक लूटमार वैसी की वैसी होती है लेकिन जनता और किसी के नाम को रोती है देश वही है राज वही है शोषण भरा समाज वही है अब तक स... [पूरी पोस्ट]
writer वीरेन्द्र जैन
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[19 Nov 2009 03:22 AM]

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