महफूज़ के नाम एक पत्र.

यादों का इन्द्रजाल... Hindi Poetry by Sulabh प्रिय महफूज़, अब तबियत कैसी है?जिंदगी एक रेस ही तो है. अलग अलग उम्र में रेस के मैदान अलग अलग होते हैं. पिताजी (पिताजी जैसे लोग), अपना बेस्ट अनुभव बेटे को देना चाहते हैं.आप ब्लोगिंग में बहूत मशरूफ रहते हैं. सिर्फ आप ही नहीं और बहुत से लोग इसमें अस्त-व... [पूरी पोस्ट]
writer सुलभ सतरंगी
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[19 Nov 2009 02:48 AM]

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