आजकल तो बोतलों पर बोतलें नित फोड़ता हूँ - बैठ कर आराम से,आराम कुर्सी तोड़ता हूँ
लीडरी का लोभ ' काका ' इसलिए नहीं छोड़ता हूँ बैठ कर आराम से , आराम कुर्सी तोड़ता हूँ बोल कर ' जयहिंद ' बन्दा शुद्ध खादी धारता है मंच के ऊपर पहुँच , लम्बी छलांगें मारता है देख कर झंडा तिरंगा हाथ दोनों जोड़ता हूँ जब नशीली वस्तुओं को दे के धरना रोकता था जो...
[पूरी पोस्ट]
AlbelaKhatri.com
52
15
0
15
5
[18 Nov 2009 22:54 PM]



Shuffle








