आजकल तो बोतलों पर बोतलें नित फोड़ता हूँ - बैठ कर आराम से,आराम कुर्सी तोड़ता हूँ

Kavi Sammelan लीडरी का लोभ ' काका ' इसलिए नहीं छोड़ता हूँ बैठ कर आराम से , आराम कुर्सी तोड़ता हूँ बोल कर ' जयहिंद ' बन्दा शुद्ध खादी धारता है मंच के ऊपर पहुँच , लम्बी छलांगें मारता है देख कर झंडा तिरंगा हाथ दोनों जोड़ता हूँ जब नशीली वस्तुओं को दे के धरना रोकता था जो... [पूरी पोस्ट]
writer AlbelaKhatri.com
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[18 Nov 2009 22:54 PM]

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