तार सप्तक में मुक्तिबोध का वक्तव्य

अनहद नाद मालवे के विस्तीर्ण मनोहर मैदानों में से घूमती हुई क्षिप्रा की रक्त-भव्य साँझें और विविध-रूप वृक्षों को छायाएँ मेरे किशोर कवि की आद्य सौन्दर्य-प्रेरणाएँ थीं। उज्जैन नगर के बाहर का यह विस्तीर्ण निसर्गलोक उस व्यक्ति के लिए, जिसकी मनोरचना में रंगीन आवेग... [पूरी पोस्ट]
writer PRIYANKAR

मुक्तिबोध

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[18 Nov 2009 14:53 PM]

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