'१० जनपथ' में 'जनता' ढूंढ़ रहा हूँ!!!

मेरा कुछ सामान... १ भूखे तुम, हम ऐश कर रहे लोकतंत्र की जय जयकार, आखिर तुमने हमें "चुना" है... *** २  छुट्टियाँ खराब करके बनाया,  एक सांचा उपर वाले ने,  और तुझे बनाकर उसे तोड़ दिया... *** ३  बेशक बहुत मेहनत का,  होता होगा खुदा का काम,  तुझ... [पूरी पोस्ट]
writer अम्बरीश अम्बुज
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[18 Nov 2009 14:14 PM]

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