पहले राष्ट्रीय फिर महाराष्‍ट्रीय

कछु ह‍मरी सुनि लीजै वाह बेटा सचिन, क्‍या बल्‍ला घुमाया है। ठाकरे की बॉल पर तुमने वो अट्ठा मारा है कि अपनेराम का दिल बल्लियों उछल रहा है। अपने निजी स्‍वार्थ के लिये रोज़ सुबह उठकर हवा में ठा ठा करने वाले इन ठाकरों को अब क्‍या कहें जिन्‍हें सामान्‍य बोलचाल की भाषा के अर्थ... [पूरी पोस्ट]
writer डॉ. कमलकांत बुधकर
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[18 Nov 2009 08:34 AM]

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