गजल ( क्या भूला क्या याद रहा )
इस मंजिल के रस्ते में, क्या-क्या छूटा कुछ याद नहीं। ये भी नहीं लगता कि कोई मंजिल इसके बाद नहीं।। रूह थकी सी लगती है, ऐ यारो अब तो जिस्म के साथ, दो पल चैन से कब सोया था यह भी ठीक से याद नहीं।। माँ ने प्यार से समझाया था, क्या करना, क्या न करना, क्या भू...
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neeshoo
गजल
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[18 Nov 2009 08:29 AM]



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