ग़ज़ल:- (साभार:- हिंदुस्तान अखबार)

अंतर्द्वंद का आइना वो साहिल पे गाने वाले क्या हुए! वो कश्तियाँ चलाने वाले क्या हुए! वो सुबह आते-आते रह गई कहाँ जो काफिले थे आने वाले क्या हुए! मैं जिन की राह देखता हूँ रात भर वो रौशनी दिखने वाले क्या हुए! वो कौन लोग हैं मेरे इधर-उधर वो दोस्ती निभाने वाले क्या हुए! इमार... [पूरी पोस्ट]
writer V. VIVEK
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[18 Nov 2009 07:23 AM]

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