मुरली तेरा मुरलीधर 33

अखिलं मधुरम् बिक जा बिन माँगे मन चाहा मोल चुका देता मधुकर जगत छोड़ देता वह आ जीवन नैया खेता निर्झर कठिन कुसमय शमित कर तेरा आ खटकाता दरवाजा टेर रहा है प्रीतिपीठिका मुरली   तेरा    मुरलीधर।।176।। रहे न तुम वह था न रहोगे तब भी वह होगा मधुकर ट... [पूरी पोस्ट]
writer हिमांशु । Himanshu
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[18 Nov 2009 07:22 AM]

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