पुस्तक समीक्षा
चिल्लर चिंतन: एक संभावना का स्वागत... ऐसा मानने में भी में कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी कि हिन्दी साहित्य में हास्य लेखन की परंपरा कम पाई जाती है। यहां व्यंग्य, इस तरह के लेखन का बुनियादी विषय रहा है। आजकल आ रहे हास्य-व्यंग्य संग्रहों में भी व्यंग्य की...
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अमिताभ बुधौलिया 'फरोग'
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[18 Nov 2009 01:18 AM]



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