बालकवि बैरागी की ग़ज़ल - मैं फिर भी गा रहा हूँ
मैं फिर भी गा रहा हूँ कितना उदास मौसम , मैं फिर भी गा रहा हूँ सरगम नहीं है सरगम , मैं फिर भी गा रहा हूँ ये दर्द का समन्दर , ये डूबता सफ़ीना चारों तरफ़ है मातम , मैं फिर भी गा रहा हूँ सपनों का आसरा था , ये भी सहम गए हैं सहमा हुआ है आलम , मैं फिर भी गा...
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[17 Nov 2009 22:37 PM]



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