बालकवि बैरागी की ग़ज़ल - मैं फिर भी गा रहा हूँ

Kavi Sammelan मैं फिर भी गा रहा हूँ कितना उदास मौसम , मैं फिर भी गा रहा हूँ सरगम नहीं है सरगम , मैं फिर भी गा रहा हूँ ये दर्द का समन्दर , ये डूबता सफ़ीना चारों तरफ़ है मातम , मैं फिर भी गा रहा हूँ सपनों का आसरा था , ये भी सहम गए हैं सहमा हुआ है आलम , मैं फिर भी गा... [पूरी पोस्ट]
writer AlbelaKhatri.com
views
59
upvote
16
downvote
0
rating
16
comments
3
[17 Nov 2009 22:37 PM]

Free Vedic Astrology From Astrobix