तुझे भेंट मे मैं क्या दूँ
ओ अनुरागी तुझे भेंट मे मैं क्या दूँ, तू ही है दाता तेरे सिवा विश्च में जो भी प्राणी है, वो है इक याचक तेरी अनुकम्पा की बारिश से जब भीगा मेरा आँचल सुधा कलश बन गई हाथ में जो थी मेरे जल की छागल दीपित हुईं दिशायें मेरी जिनपर परत जमी थी काली तेरे आशीषों स...
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राकेश खंडेलवाल
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[17 Nov 2009 21:58 PM]



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