पान दुकान भी सुनसान नजर आने लगे हैं

हम लोगों की दुनिया जब से टीवी कल्चर आया है। हर परिवार आधुनिकता के पायदान पर चढ़ता जा रहा है। इसमें पान खाने की संस्कृति में गिरावट ही आयी है। हमारे मिथिला में तो पान संस्कृति जड़ में समायी रहती है। लेकिन हमारे जैसे लोग, जो लगातार बाहर रहे, उन्होंने पान की ओर मुड़कर भी... [पूरी पोस्ट]
writer प्रभात गोपाल झा
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[17 Nov 2009 14:43 PM]

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