सम्पाति-प्रलाप

जीवन के पदचिन्ह यह रचना गत माह (टोलेडो) चिडियाघर में एक एकाकी गिद्ध को देखकर उत्पन्न हुई. मन में विचार उठा कि जटायु की मृत्यु का समाचार सुनकर सम्पाति के ह्रदय को क्या अनुभूति हुई होगी और परिणाम स्वरूप इन पंक्तियों &n... [पूरी पोस्ट]
writer Sudhir (सुधीर)

चिंतन

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[17 Nov 2009 14:07 PM]

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