मुनव्वर राणा से एक मुलाक़ात

अमाँ यार..... किसी को घर मिला हिस्से में या कोई दुकां आई/मैं घर में सबसे छोटा था मेरे हिस्से में मां आई ... ये मकबूल अशआर हैं आज के दौर के मशहूर-ओ-मारूफ़ शायर मुनव्वर राना के। अपनी रिवायत के ज्यादातर हिस्से में जो ग़ज़ल महबूब से गुफ्तगू का एक जरिया भर नज़र आती है व... [पूरी पोस्ट]
writer हिमांशु बाजपेयी
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[17 Nov 2009 13:47 PM]

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