नवम्बर की बारिश

parul chaand pukhraaj kaa..... मित्र ने कहा खेतों के लिए मुफ़ीद बारिश मिस्त्री ने बताया ढलाई की भलाई .. आँगन के कोने सूख- सूख भीजे बूँदें अटपटी टप- टप भूल चूक बरस जाएँ यहाँ वहाँ ... आसमान सुबक -सुबक ले डूबें दिन बादल घनेरे न जाने कहाँ कहाँ... छज्जे के ऊपर से मैल निरा बुहार लाई थकी... [पूरी पोस्ट]
writer पारूल
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[17 Nov 2009 10:45 AM]

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