ढलता सूरज, धीरे-धीरे ढलता है, ढल जाएगा
जहां जड़ों में सबही नचावत राम गोसाई मजबूती से स्थापित हो और जन्म-जन्मांतर के रिश्ते-नाते का हर दिमाग कायल हो, वहां भविष्य को संवारने के लिए संभावनाओं की तलाश कर उस पर अमल करना थोड़ा दुश्वारी भरा तो हो सकता है, पर है जरूरी। जरूरी इसलिए कि जन्म-जन्मांत...
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Kaushal
भविष्य की चिंताएं
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[17 Nov 2009 03:21 AM]



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