भई सूरज, ज़रा इस आदमी को जगाओ - भवानीप्रसाद मिश्र

Kavi Sammelan इसे जगाओ ...... भई सूरज , ज़रा इस आदमी को जगाओ , भई पवन , ज़रा इस आदमी को हिलाओ , यह आदमी जो सोया पड़ा है जो सच से बेख़बर सपनों में खोया पड़ा है भई पंछी , इसके कानों पर चिल्लाओ ! भई सूरज , ज़रा इस आदमी को जगाओ वक्त पर जगाओ , नहीं तो जब बेवक्त जागेगा यह... [पूरी पोस्ट]
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[16 Nov 2009 23:09 PM]

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