जीवन के द्वन्द्व

kavyakala विरह वेदना नहीं सही है जिसने मधुर मिलन का सुख आँकेगा कैसे कभी कलह की कटुता सही न जिसने प्रेम भाव का मूल्य करेगा कैसे कभी गरीबी जिसके पास न फटकी धन की कीमत वह जानेगा कैसे जिससे पीड़ा का कोई सम्बन्ध नहीं है औरों की पीड़ा वह जानेगा कैसे कभी द्वेष की लेस... [पूरी पोस्ट]
writer Laxmi N. Gupta
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[16 Nov 2009 21:25 PM]

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