तभी तुम आज कल पलट कर नहीं देखते....

कुछ पन्ने मेरी दराज़ से.... इस रोज़ के शोर ने मेरी आवाज़ छीनली है शायद, या टूट गयीं हैं वो कुछ बची हुई नाज़ुक तारें, तभी तुम आज कल पलट कर नहीं देखते.... रिश्ते में हमारी, ठंडक और धुंध पड़ गयी है शायद, या दूर से आती रौशनी हमे अँधेरे का तोफा दे गयी है, तभी तुम आज कल पलट कर नहीं देख... [पूरी पोस्ट]
writer ●๋• नीर ஐ

My Poems

views
26
upvote
1
downvote
0
rating
1
comments
2
[16 Nov 2009 15:28 PM]

Free Vedic Astrology From Astrobix