एक दिलचस्प टिप्पणी
वरिष्ठ टीवी पत्रकार श्री अंशुमान त्रिपाठी जी को मैने व्यंग्य- लुटेरों के लिए भी आचार संहिता बने- मेल किया था। जिसे पढ़ने के बाद उनकी दिलचस्पी टिप्पणी आईः संजीव संजीव भाई, लुटेरों के लिए ही आचार सहिता होती हैं। शर्माजी हमारे आपके जैसे इंसान हैं। नाईयो...
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संजीव
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[16 Nov 2009 08:29 AM]



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