जीते-जी क्यों न पढ़ लें गरुड़ पुराण ?

दिल से दिल की बात महानगरीय जीवन की कुछ मान्यताएं बीतते हुए समय के साथ परंपरा में तब्दील हो जाती हैं। गुलाबी नगर में भी ऐसी ही एक परंपरा है। यहां किसी के परलोकगमन पर मृत्यु के तीसरे दिन तीये की बैठक होती है, जिसमें परिजन-पुरजन-मित्रजन-रिश्तेदार-साथ काम करने वाले सभी एक... [पूरी पोस्ट]
writer manglam
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[16 Nov 2009 07:28 AM]

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