सबक अभी बाकी है
प्रेम ही रास्ता खोलता है , निर्मल आकाश का वरना तंग गलियों में कहाँ गुजर बाकी है छिल जाता है जिगर , घबरा के मुँह फेरता है जमीर धड़कनें साँसों से कहती हैं , सफर अभी बाकी है मोहरे बने हैं हम , खाता खुला है कर्मों के हिसाब का जिन्दगी मुस्करा के कहती है ,...
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शारदा अरोरा
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[16 Nov 2009 02:42 AM]



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