क्या फ़िर से ??

कुछ मेरी कलम से -kuch  meri kalam se ** जाने अन्जाने, कब न जाने प्रीत -प्यार के बहाने.. मेरे दिल पर तुम ने लिख दी प्यार की एक अमिट दास्तान.. उस नज़्म के लिखे शब्द अक्सर तन्हाई में मेरी.. मुझे तेरे प्रेम का राग सुनाते हैं देखती हूँ जब भी मैं आईना तेरे नयनो के.. वो प्यार भरे अक़्स अक्सर मेरी... [पूरी पोस्ट]
writer रंजना [रंजू भाटिया]
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[16 Nov 2009 02:11 AM]

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