राम लला
नेह भरी अँखियाँ जिनकी ,अधरों पै मंद सुहास पला , चित चोर गई बांकी चितवन ,जिनमे बसती चितचोर कला , गति मति की थाम लई जिन ने ,जिनकी गति मे चमकै चपला , राम को नाम सदा कहिये ,पुनि पुनि कहिये श्री राम लला ,// प्रन की प्रतिभा जग जीत गयी ,जगती जीती अति...
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डॉ.भूपेन्द्र कुमार सिंह
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[16 Nov 2009 00:58 AM]



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