प्रेम गीत
सोचता हूं लिखूं मैं भी कोई प्रेम गीत ! लिखूं सांझ की उतरती उदास धूप में पीली रोशनी के वलय-सा जगमगाता कनेर ! लिखूं भॊर की पहली किरन को रंगों के गीत पढ़ाता जवांकुसुम ! लिखूं निशा- वियोग- व्याकुल, वृन्त-प्रछ्न्न उषा के नासापुटों का गन्धमादक श्वेत नारंगी...
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Aarjav
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[15 Nov 2009 13:57 PM]



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