गिरगिट आस पास ही है

KISHORE CHOUDHARY मेरी ज़िन्दगी में नमक की तरह शामिल शाम अक्सर दिन भर के उबाऊ चेहरों और सड़े-गले पुराने संवादों को चबाने में मदद किया करती थी. अगस्त के उस दिन की धूप बहुत अकेली थी और पेड़ों के पार छीजते हुए उजाले में मेरा मन डूबता जा रहा था. दुनिया को नामुराद घोषित करने... [पूरी पोस्ट]
writer Kishore Choudhary
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[15 Nov 2009 08:51 AM]

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