मुकुट बिहारी सरोज की रचना - गणित का गीत

Kavi Sammelan हो गया है हर इकाई का विभाजन राम जाने गिनतियाँ कैसे बढ़ेंगी ? अंक अपने आप में पूरा नहीं है इसलिए कैसे दहाई को पुकारे मान , अवमूल्यित हुआ है सैकड़ों का कौन इस गिरती व्यवस्था को सुधारे जोड़ - बाकी एक से दिखने लगते हैं राम जाने पीढियां कैसे पढ़ेंगी ? शेष जि... [पूरी पोस्ट]
writer AlbelaKhatri.com
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[14 Nov 2009 22:29 PM]

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