devaluation
अवमूल्यन जो बे हुनर थे आज वो इज्ज़त म'आब* है, अच्छे भलो का देखिये ख़ाना खराब है. ताउम्र भागते रहे जिसकी तलाश में, पाया ये बिल अखीर* के वो तो सराब* है. संस्कार और शरीअते सिखलाने वालो के, हाथो में हमने देखा कि उलटी किताब है. जीरो पे है फुगाव...
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Mansoor Ali
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[14 Nov 2009 22:26 PM]



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