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पिछले पोस्ट में नीरज त्रिखा ने जो कहा उससे तो बिलकुल सहमत हूँ और हाँ बात सिर्फ कह देने से समाप्त नहीं हो जाती, वरन उस पर अमल होना चाहिए, तभी कही हुई बात लाजवाब हो जाती है अन्यथा बेबात! अब बारी इस पोस्ट की.. कुछ दिनों पहले मैं अपने कुछ दोस्तों के साथ...
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Pratik Maheshwari
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[14 Nov 2009 17:13 PM]



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