प्यारा सा बचपन

M A D (Make A Difference) लगता है ज्यों कल ही खिला था, बंद कली सा जो सिकुङा था , पंखुङियों पर पङी ओस पर, चंचल रविकर चमक उठा था, सात रंग की विभा समेटे माँ के आँचल में सिमटा था , वो मेरा प्यारा सा बचपन, पावस सा लुकता छिपता था। नहीं मिला जब कोई बहाना,मजबूरी थी शाला जाना, वहाँ पह... [पूरी पोस्ट]
writer RUPAK_REWA

Innocence

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[14 Nov 2009 13:16 PM]

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