लुटेरों की भी आचार संहिता बने
ग़ाज़ियाबाद में मेरे पड़ोसी एकदिन लुट- लुटाकर घर आए... पिटना रह गया था सो ये नहीं लिख रहा हूं कि लुट- पिटकर वापस आए। मित्रों, शर्मा जी भले आदमी हैं और मेरे जैसे दुष्ट के पड़ोसी हैं इसलिये इस भरोसे के साथ उनके लुटने की दास्तां लिख रहा हूं कि वे नाराज़...
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संजीव
रोचक
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[14 Nov 2009 09:55 AM]



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