स्मिता पाटिल की याद में, एक कविता

नदिया बहती जाए दिसंबर, 1986 को स्मिता पाटिल इस दुनिया से चली गईं। उनके सैंकड़ो दीवाने-प्रशंसको में से एक आबूधाबी में रहने वाले अपने मित्र-साहित्यकार कृष्ण बिहारी जी भी हैं। उसी दिन उनकी आह सो जो गान (कविता) उपजा , उसे उतने सालों बाद प्रकाशित करने का आज मौका आया है।... [पूरी पोस्ट]
writer Geetashree
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[14 Nov 2009 08:50 AM]

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