कहाँ है आपका गाँव पता मिले तो मुझे जरूर बताएं

hamargam मुझे याद है फोचाय मरर का वह गीत "कखन हरब दुख मोर हे भोलानाथ "इसी गीत से हमारी सुबह की शुरुआत होती थी .फोचाय मरर के इस गीत के साथ शुरू होती थी कई आवाजे ..... मवेशियों के गले मे बंधी घंटिया ,किसानो की चहल पहल ... दूर से आती ढेकी की आवाज ... उखल समाठ की... [पूरी पोस्ट]
writer vinod kumar mishra
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[14 Nov 2009 07:29 AM]

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